
आस्था के नाम पर मौत का संकल्प
108 डुबकियों ने छीन ली दो जिंदगियां, बद्रीनाथ के तप्त कुंड में भीलवाड़ा की दो बुजुर्ग श्रद्धालुओं की मौत.
आस्था जब विवेक पर भारी पड़ जाए तो हादसा और त्रासदी के बीच की दूरी बेहद छोटी रह जाती है. बद्रीनाथ धाम के महिला तप्त कुंड में शुक्रवार सुबह कुछ ऐसा ही हुआ. कुंड में 108 डुबकियां लगाने के संकल्प ने भीलवाड़ा की दो बुजुर्ग महिलाओं की जान ले ली. संकल्प पूरा करने की होड़ में दोनों यह भूल गईं कि डुबकी पानी में लगती है, लेकिन जिंदगी सांसों से चलती हैं. यह घटना महज एक हादसा कहकर भुला देने वाली नहीं है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या धार्मिक संकल्प पूरा करने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाली जा सकती है?
भीलवाड़ा जिले के मांडल क्षेत्र की रहने वाली 71 वर्षीय रामु देवी पत्नी अमरचंद शर्मा निवासी कबराड़िया और 73 वर्षीय प्रेम देवी पत्नी मदन शर्मा निवासी दाता, मांडल शुक्रवार तड़के बद्रीनाथ के महिला तप्त कुंड में स्नान करने पहुंची थीं. दोनों रिश्ते की बहनें थीं. बताया जा रहा है कि वे 108 डुबकियां लगाने के संकल्प के साथ कुंड में उतरी थीं. डुबकी लगाते-लगाते दोनों अचानक बेहोश होकर कुंड में गिर पड़ीं. आसपास मौजूद श्रद्धालुओं ने उन्हें बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. ये दोनों महिलाएं उम्र के उस पड़ाव पर थीं जहां शरीर की क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखना सबसे जरूरी मगर 108 डुबकियों के संकल्प के आगे शरीर की सीमा शायद कहीं पीछे छूट गई. डुबकियां बढ़ती गईं और सांसें उखड़ती गईं. आखिरकार आस्था का यह संकल्प दो परिवारों के लिए जिंदगी भर का मातम बन गया.
जानकारी के मुताबिक राजस्थान से 100 से ज्यादा श्रद्धालुओं का दल 4 सितंबर से बद्रीनाथ धाम में मौजूद था. दल की ओर से यहां कथा का आयोजन भी किया जा रहा था. घटना के समय मृत महिलाओं के परिवार के सदस्य मंदिर में दर्शन करने गए हुए थे और चार महिला श्रद्धालु 108 डुबकियां लगाने के संकल्प के साथ तप्त कुंड में स्नान करने पहुंची थीं. इनमें रामु देवी और प्रेम देवी के अलावा भगवती देवी और सोहनी देवी भी थीं. भगवती और सोहनी देवी स्वस्थ हैं.
'' यह हादसा शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे हुआ. दोनों महिलाएं कुंड में बेहोश हालत में मिलीं थीं उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. प्राथमिक जांच में दोनों की मौत दम घुटने से हुई है.''
दोनों की मौत की खबर जैसे ही मांडल क्षेत्र में पहुंची, गांव में शोक की लहर दौड़ गई. जानकारी मिलते ही परिजन हरिद्वार के लिए रवाना हो गए. बताया जा रहा है कि शनिवार को हरिद्वार में ही दोनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा.
‘’धर्म आस्था देता है, संबल देता है और जीवन को दिशा देता है मगर जब आस्था इंसान को अपने शरीर की चेतावनियों को नजरअंदाज करने पर मजबूर कर दे, तब वह आस्था नहीं रह जाती. बद्रीनाथ की यह घटना एक चेतावनी है कि आपका संकल्प बड़ा हो सकता है, मगर जिंदगी से बड़ा कोई संकल्प नहीं. 108 डुबकियों से पुण्य मिला या नहीं, यह आस्था का विषय है मगर अंधी आस्था में अपना जीवन खो देना मूर्खता है.’’
सवाल आस्था पर ही नहीं बल्कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी उठ रहे हैं. क्या धार्मिक अनुष्ठानों और संकल्पों के दौरान श्रद्धालुओं की उम्र, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था और चेतावनी नहीं होनी चाहिए?