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राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव में एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षण पर छिड़ा महासग्रांम.

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पंचायत प्रहरी एक स्वतंत्र न्यूज और वेब पोर्टल है जो सत्ता, समाज, खेल, साहित्य व संस्कृति, चुनाव और स्थानीय मुद्दों की पड़ताल और विश्लेषण पाठकों तक पहुंचाता है.

पंचायत प्रहरी मुख्य रूप से सत्ता और राजनीति, सामाजिक सरोकार, पंचायत एवं नगरीय निकाय, चुनाव, खेल, साहित्य, कला एवं संस्कृति तथा देश - दुनिया की बड़ी समसामयिक घटनाओं और मुद्दों की खोजी पड़ताल और विश्लेषण से प्रकाशित करता है.

पंचायत प्रहरी का विशेष फोकस राजस्थान है, मगर देश दुनिया के सियासत, सत्ता, समाज, खेल, चुनाव और अन्य राष्ट्रीय महत्व के विषयों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को भी प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाता है.

पंचायत प्रहरी का प्रयास केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं बल्कि उनके पीछे के कारणों, प्रभावों और आम लोगों से जुड़े सरोकारों को भी सामने लाना है. पोर्टल जनहित से जुड़े मुद्दों, स्थानीय समस्याओं और उन विषयों को प्राथमिकता देता है जो अक्सर मुख्यधारा की मीडिया की खबरों से ओझल रहते हैं.

जी हां, पंचायत प्रहरी का ध्येय वाक्य ही 'निष्पक्ष, बेबाक और सच्ची' पत्रकारिता है.

पंचायत प्रहरी की वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्य की खबरों के लिए अलग सेक्शन उपलब्ध है. पाठक अपने जिले का चयन कर वहां की स्थानीय खबरें, प्रशासनिक गतिविधियां, राजनीति और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.

हां. यदि किसी पाठक के पास जनहित व भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण सूचना, खबर, दस्तावेज, स्थानीय समस्या या शिकायत है तो वह पंचायत प्रहरी की ईमेल : panchayatprahri@gmail.com के जरिए हमारी संपादकीय टीम तक पहुंचा सकता है.

हां. लेखक, शोधार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, पत्रकार और विषय विशेषज्ञ सत्ता, सियासत, समाज, साहित्य, संस्कृति और अन्य जनहित के विषयों पर अपने लेख और विचार हमें ईमेल : panchayatprahri@gmail.com से भेज सकते हैं. संपादकीय मानकों के अनुरूप सामग्री का चयन किया जाता है.

यदि किसी पाठक को प्रकाशित खबर में कोई तथ्यात्मक त्रुटि दिखाई देती है तो वह प्रमाण सहित पंचायत प्रहरी की संपादकीय टीम को सूचित कर सकता है. तथ्य सही पाए जाने पर आवश्यक सुधार या स्पष्टीकरण प्रकाशित किया जाएगा.

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