
बंबोरा में नवरात्रि का अनूठा रंग ! आस्था और एकता की दिखती है मिसाल
उदयपुर जिले के कुराबड़ क्षेत्र के बंबोरा रावला में आज शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर दुर्गाष्टमी पर धर्म एवं आस्था से जुड़े अनुष्ठानों का आयोजन हुआ।
कुराबड़ (उदयपुर) - क्षेत्र के बंबोरा में आज शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर दुर्गाष्टमी पर धर्म एवं आस्था से जुड़े अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। अष्टमी तिथि सोमवार को पूरे दिन रही, जिसके चलते भक्तों ने मां दुर्गा के आठवें स्वरूप का पूजन कर व्रत-विधान संपन्न किए। रावत प्रद्युम्न सिंह कृष्णावत और मदन सिंह ने बायण माताजी मंदिर परिसर में नवचंडी यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें विधि-विधान से पूजन-पाठ हुआ। शिवप्रसाद शर्मा ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी नवचंडी यज्ञ श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे और मां दुर्गा की आराधना करते हुए सामूहिक कल्याण की कामना की।
कस्बे में नवरात्रि के पावन अवसर पर मंगलवार को देवी-देवरों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ज्वारा विसर्जन हुआ। कार्यक्रम में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। दोपहर करीब 1 बजे धर्मराज मंदिर परिसर में हवन-पूजन के बाद परंपरानुसार ज्वारे उठाए गए। इसके पश्चात मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई, जो मुख्य बाजार से होते हुए नदी तट तक पहुंची। यहां विधि-विधान से ज्वारों का विसर्जन किया गया। इस दौरान भक्तों ने माता के जयकारों के साथ भागीदारी निभाई। ग्रामीणों ने शोभायात्रा में शामिल होकर श्रद्धा और उत्साह के साथ प्रस्तुतियों का आनंद लिया तथा देवी के दर्शन कर मंगलकामनाएं मांगीं। धार्मिक अनुष्ठानों के चलते कस्बे में उत्सव का माहौल बना रहा।
धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का अनूठा संगम
बंबोरा कस्बे के बड़ली माताजी परिसर में नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाला गरबा महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की एक मिसाल बन गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भव्य सजावट और भक्तिमय माहौल, युवाओं और भामाशाहों की अहम भूमिका
नवरात्रि के अवसर पर मंदिरों और गरबा स्थल को आकर्षक विद्युत रोशनी से सजाया जाता है। यहां श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ गरबा रास में भाग लेते हैं। वहीं, महाआरती के दौरान क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।
महोत्सव के सफल संचालन में स्थानीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी रहती है, जो टेंट, साउंड और बैठने की व्यवस्था संभालते हैं। इसके अलावा, स्थानीय भामाशाहों के सहयोग से यह आयोजन सामूहिक सहभागिता और सामाजिक समरसता का बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

