
लगातार 25वें वर्ष निकली पदयात्रा, 450 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे अडिंदा पारसनाथ
आस्था, अनुशासन और धर्ममय वातावरण के बीच उदयपुर से अडिंदा पारसनाथ तक लगातार 25वें वर्ष पदयात्रा निकाली गई। रजत जयंती वर्ष के इस विशेष आयोजन में 450 से अधिक श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। सेवाश्रम से शुरू हुई पदयात्रा देबारी, डबोक, मोड़ी और बाठेड़ा होते हुए अतिशय क्षेत्र अडिंदा पारसनाथ पहुंची, जहां ट्रस्ट परिवार ने सभी पदयात्रियों का स्वागत और सम्मान किया।
कुराबड़ (उदयपुर) - आस्था, अनुशासन और धर्म के प्रति समर्पण का अद्भुत नजारा रविवार को देखने को मिला, जब उदयपुर से 450 से अधिक श्रद्धालु पदयात्रा करते हुए अतिशय क्षेत्र अडिंदा पारसनाथ पहुंचे। बीसा नरसिंहपुरा दिगंबर जैन समाज नवयुवक मंडल उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित यह पदयात्रा लगातार 25वें वर्ष आयोजित हुई। रजत जयंती वर्ष होने के कारण इस बार आयोजन को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह नजर आया। पदयात्रा का शुभारंभ उदयपुर से महापौर पारस सिंघवी ने हरी झंडी दिखाकर किया। सेवाश्रम से शुरू हुई पदयात्रा देबारी, डबोक, मोड़ी और बाठेड़ा होते हुए अडिंदा पारसनाथ पहुंची। यात्रा में युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बुजुर्ग और छोटे बच्चे भी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में धार्मिक जयघोष के साथ उत्साहपूर्वक पदयात्रा पूरी की।
25 साल से निभ रही आस्था की परंपरा
प्रवक्ता अनिल स्वर्णकार ने बताया कि दशलक्षण पर्व के बाद प्रतिवर्ष उदयपुर से अडिंदा पारसनाथ के लिए पदयात्रा आयोजित की जाती है। इस वर्ष इस धार्मिक परंपरा को लगातार 25 वर्ष पूरे हो गए। रजत जयंती वर्ष होने के कारण पदयात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या भी उल्लेखनीय रही।
जैन कुल में जन्म लेना तभी सार्थक, जब संस्कारों का पालन करें
धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणिनी आर्यिका सुभूषणमति माताजी ने कहा कि जैन कुल में जन्म लेना अपने आप में बड़ी बात नहीं है। जन्म की सार्थकता तभी है, जब व्यक्ति जैन धर्म के संस्कारों और सिद्धांतों का पूर्ण रूप से पालन करे।
उन्होंने कहा कि नित्य देव दर्शन, रात्रि भोजन का त्याग, पानी छानकर पीना और देव-शास्त्र-गुरु के प्रति भक्ति जैन जीवन की पहचान है। माताजी ने श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति से अपने जीवन को मजबूत बनाने का संदेश देते हुए कहा कि जिस तरह इलेक्ट्रिक कार को कुछ घंटे चार्ज करने के बाद वह लंबे समय तक चलती है, उसी तरह मनुष्य को भी परमात्मा की भक्ति से अपने पुण्य को चार्ज करते रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामान की अटैची साथ हो या न हो, लेकिन यदि पुण्य की अटैची साथ है तो जीवन के कार्य निर्विघ्न होते रहेंगे। माताजी के इस संदेश ने धर्मसभा में मौजूद श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।
युवाओं के साथ बुजुर्ग और बच्चे भी बने सहभागी
पदयात्रा में इस बार समाज के सभी आयु वर्ग के लोगों ने भाग लिया। युवाओं के साथ बुजुर्गों और छोटे बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ पैदल यात्रा की। इससे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकजुटता का भी संदेश देखने को मिला।
कार्यक्रम में नवयुवक मंडल अध्यक्ष आशीष मेहता, मंडल सचिव मयंक सिपरिया, समाज अध्यक्ष ऋषभ जयसिंहगोत, महामंत्री अनिल मेहता, विमल नाथूत, अनिल सिपरिया, मुकेश सिपरिया, कमलेश सिपरिया, प्रवीण सिंघवी, उमंग नावडिया सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।
