प्रश्नपत्र लीक नैतिक संकट है तो करोड़ों रुपये लेकर मेडिकल सीटों की वैध बिक्री सामान्य व्यवस्था क्यों मानी जाती है. आखिर एक अवैध पेपर लीक पर देशव्यापी आक्रोश होता है, जबकि मैनेजमेंट कोटे के नाम पर शिक्षा की खुली खरीद-फरोख्त को व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा क्यों स्वीकार कर लिया गया है.