
हमारे बारे में
पंचायत प्रहरी जन सरोकार आधारित खोजी पत्रकारिता का एक स्वतंत्र मंच है. हम गांव, शहर, पंचायत, किसान, युवा, बेरोजगारों, महिलाओं और समाज के उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं जो अक्सर मीडिया की नजरों से ओझल रहते हैं.

“सत्ता की आंख में आंख डालकर सवाल करना”
निष्पक्ष, तथ्यपरक, बुलंद और बेबाक पत्रकारिता
हमारे लिए पत्रकारिता सिर्फ सूचना देना नहीं बल्कि सत्ता की आंख में आंख डालकर सवाल करना, सच तक पहुंचना और समाज के सामने उन मुद्दों को रखना है जिन पर बात करना जरूरी है. हमारी नजर हमेशा उन सवालों पर रहेगी जिनका जवाब जनता चाहती है.
वर्तमान मीडिया की स्थिति
आज मीडिया का एक बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट हितों, बाजार और सत्ता के प्रभाव में अपनी स्वतंत्र पहचान और मूल पत्रकारिता के मूल्यों से भटक चुका है.
टूटता भरोसा
इनके पेशेवर मानदंडों में गिरावट, नैतिक सीमाओं का उल्लंघन और खबरों की गुणवत्ता में कमी ने पाठकों के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है.
हमारा संकल्प
पंचायत प्रहरी पाठकों के इसी टूटते भरोसे को फिर से कायम करने का प्रयास है.
सच और सवाल
इनकी खबरों में सच से ज्यादा शोर, सूचना से ज्यादा प्रचार और सवालों से ज्यादा पक्षधरता परोसी जाती है. हम इसे बदलना चाहते हैं.
दबी आवाज़ों को मंच
हम सत्ता की चौखट चूमने के बजाय उन लोगों तक पहुंचना चाहते हैं जिनकी आवाज दबा दी गई है और जिनके सवालों को उठाया जाना जरूरी है.
जनता के साथ
हम सब मिलकर ऐसी पत्रकारिता को मजबूत करें जो सत्ता के करीब नहीं बल्कि जनता के साथ खड़ी हो.
इस प्रयास को अपना सहयोग दें
अगर आप भी मानते हैं कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता जरूरी है तो पंचायत प्रहरी को सहयोग दीजिए. आपका छोटा सा सहयोग हमें बड़ी ताकत देगा.