
कुराबड़ में किसका पलड़ा भारी?
नाम वापसी के बाद 15 वार्डों का रण तैयार, अधिकांश सीटों पर कांग्रेस-भाजपा में सीधी टक्कर मगर कुछ जगह त्रिकोणीय मुकाबले के भी आसार
उदयपुर की कुराबड़ पंचायत समिति चुनाव के पहले चरण में नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही सियासी मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है. पंचायत समिति के सभी 15 वार्डों में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रत्याशियों के बीच सीधी चुनावी जंग की तैयारी है.
अधिकांश वार्डों में कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं, मगर कुछ वार्डों में निर्दलीय और अन्य पार्टियां इनके समीकरण बिगाड़ सकती हैं. वार्ड 2 में भारत आदिवासी पार्टी और वार्ड 8 में निर्दलीय प्रत्याशी की मौजूदगी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है. ऐसे में चुनावी लड़ाई केवल पार्टी के चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय समीकरण, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता भी नतीजों को प्रभावित कर सकती है.
नामांकन वापसी के अंतिम दिन वार्ड 2 से निर्दलीय भगवत सिंह, वार्ड 4 से मेथीराम, वार्ड 8 से उदय लाल पटेल, देवेंद्र कुमार और लक्ष्मी लाल पटेल, वार्ड 14 से नर्बदा पटेल तथा वार्ड 15 से टमा कुंवर ने नाम वापस लिया. इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी एवं आईएएस अदिति यादव की ओर से अंतिम प्रत्याशी सूची जारी की गई. नाम वापसी के बाद मुकाबले से बाहर हुए उम्मीदवारों के समर्थकों का रुख भी कुछ वार्डों में चुनावी गणित के लिहाज से अहम हो सकता है.
कुराबड़ पंचायत समिति में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है. दोनों दलों के लिए यह चुनाव केवल पंचायत समिति में प्रतिनिधित्व हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत दिखाने का भी अवसर है. कांग्रेस जहां स्थानीय नेतृत्व और अपने पुराने विकास कार्यों के सहारे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करेगी, वहीं भाजपा के सामने अपने प्रत्याशियों के पक्ष में समर्थन जुटाने और वार्ड स्तर पर संगठन को प्रभावी बनाए रखने की चुनौती होगी.
15 में से अधिकांश वार्डों में सीधा मुकाबला होने के कारण प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय संपर्क और जातीय-सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं. पंचायत चुनाव में स्थानीय समस्याएं, विकास कार्य, व्यक्तिगत संबंध और गांवों में सक्रियता अक्सर पार्टी के व्यापक राजनीतिक नैरेटिव से अलग भूमिका निभाते हैं. इसलिए किसी दल की समग्र राजनीतिक स्थिति के आधार पर सभी वार्डों के नतीजों का अनुमान लगाना आसान नहीं होगा.
वार्ड 2 में कांग्रेस के गोपाल लाल, भाजपा के लोकेश और भारत आदिवासी पार्टी के इस्लामुद्दीन के बीच मुकाबला होगा. यहां बीएपी की मौजूदगी चुनाव को दिलचस्प बना रही है. आदिवासी मतदाताओं के बीच स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशी की स्वीकार्यता के आधार पर मुकाबले का स्वरूप बदल सकता है. हालांकि बीएपी की मौजूदगी से किस दल को नुकसान या फायदा होगा, यह मतदाताओं के वास्तविक रुझान पर निर्भर करेगा. वार्ड 8 में कांग्रेस के दिनेश कुमार चौधरी और भाजपा के भगवती लाल पटेल के सामने निर्दलीय पुष्कर दास वैष्णव चुनौती पेश कर रहे हैं. निर्दलीय प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय समर्थन यहां निर्णायक हो सकता है. यदि निर्दलीय प्रत्याशी प्रभावी समर्थन जुटाते हैं तो दोनों प्रमुख दलों के लिए जीत का गणित प्रभावित हो सकता है.
चुनावी तस्वीर साफ होने के साथ ही कांग्रेस में टिकट वितरण और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. वल्लभनगर की पूर्व विधायक प्रीति गजेंद्र सिंह शक्तावत और पूर्व मंत्री अर्जुन बामनिया से जुड़े नेताओं की सक्रियता पर भी नजर है. पार्टी के भीतर प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार की रणनीति और स्थानीय नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है.
15 वार्डों की चुनावी तस्वीर
वार्ड नंबर एक में कांग्रेस की पपुकी बाई और भाजपा की मोती बाई भील के बीच टक्कर है वहीं वार्ड नंबर दो में कांग्रेस के गोपाल लाल व भाजपा के लोकेश को भारतीय आदिवासी पार्टी के इस्लामुद्दीन से टक्कर मिल रही है. वार्ड नंबर 3 में कांग्रेस के भगवती लाल व भाजपा के राजमल मेघवाल के बीच मुकाबला है वहीं वार्ड नंबर चार में कांग्रेस के माथु को भाजपा के लेहरी लाल टक्कर देंगे. वार्ड नंबर 5 में कांग्रेस की रेखा कंवर और भाजपा की गद्दु कंवर के बीच चुनावी रण होगा वहीं वार्ड नंबर 6 में कांग्रेस के शक्ति सिंह कृष्णावत और भाजपा के गंगाराम मैदान में हैं.
वार्ड नंबर 7 में कांग्रेस के बाबू मीणा और भाजपा के भरत कुमार मीणा के बीच चुनावी बिसात बिछी है वहीं वार्ड नंबर आठ में कांग्रेस के दिनेश कुमार चौधरी और भाजपा के भगवती लाल पटेल की राह में निर्दलीय पुष्कर दास वैष्णव रूकावट डाल रहे हैं. वार्ड नंबर 9 में कांग्रेस की दीपिका मीणा व भाजपा की लीला बाई, वार्ड नंबर 10 में कांग्रेस की कुंदन कंवर और भाजपा की चंदा औदिच्य, वार्ड 11 में कांग्रेस के मनरूप और भाजपा के लोगर लाल, वार्ड 12 में कांग्रेस के राम लाल पटेल व भाजपा के भैरू लाल, वार्ड 13 में कांग्रेस की इंद्रा कंवर राजपूत और भाजपा की हेतल कंवर, वार्ड 14 में कांग्रेस की बबली व भाजपा की हेमा और वार्ड नंबर 15 में कांग्रेस की लवीना जारोली और भाजपा की अनिता जारोली के बीच सीधी टक्कर है.
हालांकि, कुराबड़ पंचायत समिति के अधिकांश वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर जरूर है, मगर हर वार्ड का मुकाबला अलग स्थानीय परिस्थितियों में लड़ा जाएगा. स्थानीय असंतोष, प्रत्याशियों के व्यक्तिगत संबंध और कार्यकर्ताओं की सक्रियता चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है. अब दोनों प्रमुख दलों के सामने चुनौती नामांकन की प्रक्रिया से आगे बढ़कर मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की है. चुनावी अभियान में कौन-सा दल अपने प्रत्याशियों के पक्ष में बेहतर तालमेल बना पाता है और कौन स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा. फिलहाल कुराबड़ में चुनावी बिसात बिछ चुकी है और मुकाबले का वास्तविक रुख मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा.
