
भबराना गरबा महोत्सव : नौ रातों तक मां दुर्गा की भक्ति में झूमता है पूरा कस्बा
नवरात्रि की नौ रातें, मां दुर्गा की आराधना और गरबा गीतों की गूंज… सलूंबर जिले के भबराना कस्बे का गणेश चौक इन दिनों भक्ति और उत्साह के अनूठे संगम का केंद्र बन जाता है। गणेश मित्र मंडल की ओर से आयोजित गरबा महोत्सव में आकर्षक विद्युत सजावट, पारंपरिक वेशभूषा में गरबा रास करते प्रतिभागी और आसपास के गांवों से उमड़ते श्रद्धालु आयोजन की रौनक बढ़ाते हैं। धार्मिक आस्था से शुरू हुआ यह आयोजन अब भबराना की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।
सलूंबर - जिले के झल्लारा क्षेत्र के भबराना कस्बे में नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाला गरबा महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की पहचान बन चुका है। गणेश चौक में गणेश मित्र मंडल के संयोजन में आयोजित इस महोत्सव में नौ दिनों तक भक्तिमय माहौल रहता है। आकर्षक विद्युत सजावट, मधुर संगीत और पारंपरिक गरबा रास के बीच पूरा कस्बा उत्सव के रंग में रंगा नजर आता है। आयोजन में भाग लेने के लिए भबराना सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिरों के बीच सजा गरबा स्थल, नवरात्रि में दिखती है भक्ति की छटा
गणेश चौक स्थित गरबा स्थल के आसपास रामदेवजी, संतोषी माता, गणेशजी और भगवान विश्वकर्मा के मंदिर हैं। नवरात्रि में मंदिरों और गरबा स्थल को आकर्षक सजावट एवं विद्युत रोशनी से सजाया जाता है। श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन करने के साथ मां दुर्गा की आराधना करते हैं और गरबा रास में शामिल होकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
गणेश मित्र मंडल के युवा संभालते हैं व्यवस्थाएं
महोत्सव के आयोजन में गणेश मित्र मंडल के युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। सदस्य तैयारियों से लेकर कार्यक्रम के संचालन तक सक्रिय रहते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने, टेंट और साउंड सिस्टम की व्यवस्था की जाती है। स्थानीय भामाशाहों का सहयोग भी आयोजन को व्यवस्थित बनाने में अहम रहता है।
महाआरती में सुख-समृद्धि की कामना
गरबा महोत्सव में मां दुर्गा की आराधना के साथ महाआरती भी प्रमुख धार्मिक आयोजन रहती है। श्रद्धालु एकत्रित होकर माता की आरती करते हैं और क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना करते हैं। इसके बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
भबराना का गरबा महोत्सव धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ सामाजिक एकता का संदेश भी देता है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी, भामाशाहों का सहयोग और ग्रामीणों का उत्साह इस आयोजन को सामूहिक सहभागिता का उदाहरण बनाते हैं। यही वजह है कि गणेश चौक का यह महोत्सव नवरात्रि के दौरान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान रखता है।
