
आस्था के संग सामाजिक एकता का संदेश
उदयपुर में 29 अक्टूबर को होगा 24 महिलाओं का सामूहिक करवा चौथ उद्यापन
धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और परंपराओं के संरक्षण की मिसाल पेश करते हुए सालवी बुनकर समाज, मेवल क्षेत्र (सेवा समिति) की ओर से सामूहिक करवा चौथ व्रत उद्यापन का आयोजन किया जाएगा. 29 अक्टूबर को उदयपुर के सेक्टर-9 स्थित सामुदायिक भवन में होने वाले इस आयोजन में मेवल क्षेत्र के विभिन्न गांवों और इलाकों की 24 महिलाएं सामूहिक रूप से उद्यापन करेंगी. आयोजन को लेकर समाजजनों में उत्साह का माहौल है.
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शाम 6:30 बजे पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत होगी. शाम 7 बजे करवा चौथ की कथा एवं आरती होगी. इसके बाद शाम 7:30 बजे महाप्रसादी और स्नेहभोज का आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम में समाज के लोगों के सामूहिक सहभागिता के साथ धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और आपसी मेलजोल को मजबूत करने पर जोर रहेगा.
24 महिलाएं करेंगी सामूहिक उद्यापन :
इस सामूहिक आयोजन में बंबोरा, करावली, पाटन, सिंघावली, सुलावास, कराकला, चिबोडा, रोडडा, खोदाव, जगत, चरमर, नईजर, गुदली, बंदोली, रावतपुरा सहित विभिन्न गांवों और उदयपुर के सेक्टर-9 क्षेत्र की महिलाएं शामिल होंगी. उद्यापन करने वाली महिलाओं में मोहिनी देवी मंकवाना (बंबोरा), शांता देवी एवं रूपा देवी पंडोर (करावली), राजकुमारी देवी मंकवाना (बंबोरा), मीना देवी गारिया (पाटन), लक्ष्मी देवी डगडोती (सिंघावली), जमना देवी पडियार (सुलावास), दुर्गा देवी पणोर (कराकला), नारायणी देवी मंडोटी (चिबोडा), लक्ष्मी देवी सोनार्थी एवं रेखा देवी पिछोलिया तथा दुर्गा देवी पिछोलिया (रोडडा), मीरा देवी मणोती (खोदाव), चंदा देवी बामणिया एवं मधुलता देवी बामणिया (जगत), टीना देवी डगडोती (चरमर), तारा देवी कडोरी (नईजर), लक्ष्मी देवी रायकवाल (गुदली), इंद्रा देवी डशिया (बंदोली), चंदा देवी रायकवाल (सेक्टर-9), शांता देवी मंडोटी एवं सोहनी देवी मंडोटी (चिबोडा), निर्मला देवी सोलंकी (चंदाजी गुढ़ा), सीमा देवी चौहान (रावतपुरा) और लाली देवी मणोती (जावद) शामिल हैं.
उपहार-भेंट स्वीकार नहीं :
सालवी बुनकर समाज मेवल क्षेत्र सेवा समिति एवं सामूहिक करवा चौथ उद्यापन करने वाली महिलाओं की ओर से समाज के सभी लोगों को सपरिवार आयोजन में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है. आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की भेंट या उपहार स्वीकार नहीं किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य आयोजन को सादगीपूर्ण रखते हुए धार्मिक आस्था, सामाजिक सद्भाव और सामूहिक सहभागिता को प्राथमिकता देना है.
