
एक किलोमीटर दूर पंचायत छोड़ नौ किलोमीटर दूर भेजा, अब ग्रामीणों ने किया मतदान बहिष्कार का ऐलान
आसींद से महज 10 किलोमीटर दूर कुराछो का खेड़ा के ग्रामीणों का फैसला, करीब 600 मतदाता पंचायत चुनाव सहित किसी भी चुनाव में वोट नहीं डालने पर अड़े
पंचायत बदलने से बढ़ी परेशानी को लेकर कुराछो का खेड़ा गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का ऐलान किया है. गुरुवार सुबह गांव के चारभुजा मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब तक गांव को वापस रूपपुरा ग्राम पंचायत में शामिल नहीं किया जाता तब तक वे पंचायत चुनाव सहित किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे. ग्रामीणों ने गांव के दोनों ओर बहिष्कार के बैनर लगाकर अपनी मांग को लेकर विरोध भी दर्ज कराया है.
ग्रामीण चांदमल शर्मा ने बताया कि कुराछो का खेड़ा पहले रूपपुरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था.
रूपपुरा गांव से कुराछो का खेड़ा महज एक किलोमीटर दूर है, मगर बाद में इसे बागमाली ग्राम पंचायत में शामिल कर दिया गया जो गांव से करीब नौ किलोमीटर दूर है. इससे ग्रामीणों को पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. ग्रामीणों का कहना है - ''गांव की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और यहां रहने वाले परिवार मुख्य रूप से किसान हैं. ऐसे में पंचायत संबंधी कामों के लिए दूर जाना उनके लिए परेशानी का कारण बन रहा है. ग्रामीणों की मांग है कि गांव को फिर से रूपपुरा ग्राम पंचायत में शामिल किया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक दूरी तय नहीं करनी पड़े.''
मांग पर सुनवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने गांव के दोनों ओर मतदान बहिष्कार के बैनर लगाए हैं. दीवारों पर भी बहिष्कार से जुड़े नारे लिखे गए हैं. बैनरों पर 'सही सोच, सही फैसला—मतदान बहिष्कार' और 'लोकतंत्र का सही स्वरूप जनता की मर्जी से चलेगा' जैसे संदेश लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की गई है.ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक कुराछो का खेड़ा को वापस रूपपुरा ग्राम पंचायत में शामिल करने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे. अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस मांग पर क्या कदम उठाता है.

कुराछो का खेड़ा में करीब 200 घर हैं और लगभग 600 मतदाता रहते हैं. ग्रामीणों ने पंचायत बदलने के फैसले पर पहले भी आपत्ति जताई थी. इस संबंध में उपखंड अधिकारी, जिला कलेक्टर सहित संबंधित विभागों को ज्ञापन देकर समस्या के समाधान की मांग की गई, मगर हमारी मांंग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसलिए अब हमने पंचायत चुनावों के बहिष्कार का निर्णय किया है.
