
कुराबड़ की 29 पंचायतों की सरकार तैयार
मतदान में नजर आया जबरदस्त उत्साह, भैंसड़ाकला में सबसे ज्यादा 88.93 फीसदी मतदान. बुजुर्गों और दिव्यांगों ने भी उत्साह से किया मताधिकार का इस्तेमाल.
उदयपुर की कुुुुुुराबड़ पंचायत समिति में गांवों की सरकार चुनने के लिए ग्रामीणों में खासा उत्साह नजर आया. पंचायतीराज चुनाव के प्रथम चरण के तहत 24 अक्टूबर को 29 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ. निर्वाचन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में कुल 76.48 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लगी रहीं. महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने लोकतंत्र के इस पर्व में भागीदारी निभाई. दिव्यांग और अस्वस्थ मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने में भी सहयोग किया गया.
सुबह 7 बजे मतदान शुरू होते ही ग्रामीणों का मतदान केंद्रों पर पहुंचना शुरू हो गया. दिन चढ़ने के साथ कई केंद्रों पर मतदाताओं की कतारें लंबी होती गईं. बम्बोरा, बेमला, भैंसडाकला, बिछड़ी, कुराबड़, जगत, सोमाखेड़ा और सुलवास सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों में मतदान को लेकर उत्साह दिखाई दिया. इस दौरान बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और दिव्यांग मतदाताओं ने भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचाने और मतदान प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए स्काउट स्वयंसेवक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैनात रहे. रैंप और व्हीलचेयर जैसी सुविधाओं की मदद से मतदान को सुगम बनाने के प्रयास किए गए.
मतदान के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भैंसडाकला ग्राम पंचायत में सर्वाधिक 88.93 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. यहां कुल 1772 मतदाताओं में से 1576 ने वोट डाले. दूसरी ओर, बम्बोरा में 61.5 फीसदी मतदान हुआ, जबकि वल्लभ क्षेत्र में मतदान का आंकड़ा 62.44 फीसदी रहा. मतदान प्रतिशत में यह अंतर अलग-अलग ग्राम पंचायतों में मतदाताओं की भागीदारी की तस्वीर सामने रखता है.
कई ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के साथ वार्ड पंच के चुनाव को लेकर भी खासा उत्साह रहा. प्रत्याशी और उनके समर्थक मतदाताओं से संपर्क करते नजर आए. शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय रहे. संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए तथा अधिकारियों ने क्षेत्र में व्यवस्थाओं का जायजा लिया.

ग्राम पंचायतों में मतदान के साथ गांवों की नई सरकार चुनने की प्रक्रिया का अहम चरण पूरा हो गया है. अब ग्रामीणों की उम्मीदें पेयजल, सड़क, बिजली, स्वच्छता, सरकारी योजनाओं के लाभ और स्थानीय समस्याओं के समाधान पर टिकी हैं. नवनिर्वाचित सरपंचों और वार्ड पंचों के सामने गांवों की जरूरतों को प्राथमिकता देने और विकास कार्यों को गति देने की चुनौती होगी.मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है. अब नए जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होगी कि वे जनता के भरोसे पर खरा उतरें और गांवों के विकास को केवल चुनावी वादों तक सीमित न रहने दें.
