कुछ लोग अपनी ज़िंदगी जीते हैं, कुछ लोग अपने दौर को बदलते हैं और कुछ लोग अपनी मिट्टी की रूह बन जाते हैं. केशरीचंद 'के.सी.' मालू ऐसी ही शख़्सियत थे.
मनरेगा बनाम वीबी जी राम जी