
न दुश्मनी, न विवाद... फिर 71 साल के बुजुर्ग पर क्यों चली गोली?
निशाना बुजुर्ग था या कोई ओर?
28 अगस्त की रात और समय 8.15 बजे. भीलवाड़ा के मांडल तहसील के सिरडियास गांव में सन्नाटा पसरा था. बाड़े में पशुओं की हल्की आहट के बीच 71 वर्षीय शंकर सिंह खाना खा रहे थे. उम्र के इस पड़ाव पर शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों बाद यह रात आफत बनकर उन पर टूटने वाली है. शंकर की निगाह खाने की थानी पर थी तभी तेज धमाका हुआ और उनकी छाती से खून बहने लगा. अंधेरे में वह समझ ही नहीं पाया कि आखिर हुआ क्या है. न उन्होंने किसी को आते देखा, न किसी से कोई कहासुनी हुई. हालांकि, पुलिस ने पांच दिन में ही घटना की गुत्थी सुलझा ली है फिर भी कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब अभी भी रहस्य के घेरे में है.
सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि आखिर निशाना कौन था, शंकर सिंह या कोई और? जिन दो लोगों को पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार किया है, उनकी शंकर सिंह से कोई जान-पहचान नहीं बताई गई है. न कोई पुरानी दुश्मनी, न विवाद और न ही लेन-देन. फिर आखिर अंधेरी रात में बाड़े में बैठे एक 71 वर्षीय बुजुर्ग तक फायरिंग कैसे पहुंच गई?
क्या शंकर सिंह को भी आरोपियों ने शिकार समझ लिया था? क्या गोली चलाने वालों का निशाना कोई और था और छर्रा संयोग से बुजुर्ग को जा लगा? या फिर उस रात सिरडियास के उस बाड़े में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी पूरी कहानी अभी सामने आना बाकी है?
पुलिस ऐसे पहुंची आरोपियों तक :
बुजुर्ग पर हुई फायरिंग की घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने मौके पर मोबाइल फोरेंसिक टीम और स्पेशल मोबाइल अनुसंधान टीम को बुलाया. पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बुधराज व पुलिस उप अधीक्षक माण्डल राहुल जोशी को जांच का जिम्मा सौंपा. थानाधिकारी गजेंद्र सिंह नरूका के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच की. पुलिस ने गांव में मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया. शिकार का शौक रखने वाले लोगों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई गई. तकनीकी साक्ष्यों और लगातार पूछताछ के बाद पुलिस की जांच जवाहरलाल उर्फ प्रकाश भील और छोटू भील तक पहुंची. दोनों को डिटेन कर पूछताछ की गई, जिसमें पुलिस के अनुसार घटना में उनकी संलिप्तता सामने आई. इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
