
दबंगई का दुस्साहस
भीलवाड़ा के रावों का खेड़ा में सामने आया महिला की गरिमा को तार तार करने वाला मामला, खंभे से बांधकर रखा, सामाजिक बहिष्कार किया, मूत्र पिलाने की कोशिश
राजस्थान में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और कानून के राज को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
भीलवाड़ा के रावों का खेड़ा में एक परिवार पर घर में घुसकर हमला करने, बहू को घसीटने, महिलाओं को मंदिर में खंभे से बांधकर रखने, जमीन हड़पने व 9 लाख रुपए के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है कि यह महज मारपीट की शिकायत तक सीमित नहीं है. पुलिस को दी गई रिपोर्ट में कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार, महिला के साथ जबरदस्ती, बंधक बनाने और अमानवीय व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
माया, झागुड़ी और लाडू देवी पर शांति देवी के गले से सोने का मंगलसूत्र छीनने का आरोप है. पीड़िता के अनुसार, चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो आरोपी कथित तौर पर परिवार के सदस्यों को घसीटते हुए चारभुजा नाथ मंदिर ले गए. वहां तीनों को खंभे से बांधकर रखा गया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीड़ितों को दोपहर करीब 1 बजे से शाम 5 बजे तक धूप में बांधकर रखा गया और पानी तक नहीं दिया गया. साथ ही, किसी ग्रामीण द्वारा फोटो-वीडियो बनाने या पुलिस में गवाही देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है.
सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि एक पीड़ित को एकांत स्थान पर ले जाकर अमानवीय व्यवहार किया गया और पेशाब पिलाने का प्रयास किया गया. पीड़िता ने मकान-जमीन के कागजात अपने नाम कराने या 9 लाख रुपए देने का दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है. मांडल थाना पुलिस ने शांति देवी की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 126(2), 333, 79, 189(2), 127(2) और 308(2) के तहत मामला दर्ज किया है. प्रकरण की जांच हेड कांस्टेबल श्यामसुंदर (का.नि. 1496) को सौंपी गई है.
सामाजिक बहिष्कार का आरोप: दुकानदारों से सामान नहीं देने को कहा?
शांति देवी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि घटना से दो-तीन दिन पहले परिवार का कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार कराया गया था. आरोप है कि दुकानदारों को परिवार को सामान नहीं देने के लिए कहा गया. इस मामले के समाज की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है क्योंकि गांव में कोई भी पीड़ित के साथ नहीं खड़ा हुआ।
प्रतापगढ़ से बांसवाड़ा तक: महिलाओं के अपमान और हिंसा की घटनाएं फिर चर्चा में :
राजस्थान में महिला अत्याचार की रावों का खेड़ा की यह घटना कोई इकलौती घटना नहीं है। इस घटना ने पिछले कुछ समय में महिलाओं के साथ हुई शर्मनाक घटनाओं के उन घावों को ओर गहरा कर दिया है जिसमें महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और स्वाभिमान को तार तार कर रख दिया गया.
बांसवाड़ा का अर्थूना गांव : 1 सितंबर 2026 :
यहां करीब 40 वर्षीय आदिवासी महिला के साथ उसके पति और रिश्तेदारों ने कथित तौर पर मारपीट की, उसका सर मुंडवाया और कपड़े फाड़कर उसे अर्धनग्न अवस्था में गांव में घुमाया। कुछ रिपोर्टों में इसे निर्वस्त्र कर घुमाने के रूप में भी बताया गया है।
प्रतापगढ़ | धरियावद, सितंबर 2023 :
प्रतापगढ़ के धरियावद क्षेत्र में एक आदिवासी महिला को निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने और मारपीट करने का मामला सामने आया था. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी. इस मामले ने महिला की गरिमा, सामाजिक दबाव और कानून के राज पर देशव्यापी बहस छेड़ दी थी.
बांसवाड़ा | फरवरी 2024 :
बांसवाड़ा में एक महिला को कथित तौर पर डायन बताकर निर्वस्त्र कर खाट से बांधने और पीटने का मामला सामने आया था. रिपोर्टों के अनुसार, महिला के पति, सास और सौतन पर आरोप लगे थे. यह घटना अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा की भयावह तस्वीर सामने लाती है.
बांसवाड़ा | मई 2024 :
बांसवाड़ा में शादी समारोह से लौट रही 19 वर्षीय युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और तलवार से हमला करने का मामला सामने आया था. रिपोर्ट के अनुसार, युवती के हाथ की उंगलियां काट दी गई थीं. यह मामला महिलाओं की सहमति, सुरक्षा और हिंसा के गंभीर सवालों को सामने लाया था.
सवाल सिर्फ रावों का खेड़ा में शांतिदेवी और उसके परिवार के साथ हुई अमानवीयता का नहीं है. सवाल उस मानसिकता का भी है, जिसमें रंजिश, शक और सामाजिक दबाव के नाम पर किसी परिवार की गरिमा और सुरक्षा को कुचलने की कोशिश की गई है.
प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा की घटनाओं ने पहले ही राजस्थान में महिला सुरक्षा और सामाजिक कुरीतियों पर गंभीर बहस खड़ी की थी ऐसे में अब भीलवाड़ा के इस मामले में आरोपों की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना पुलिस-प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
