
संदूक में मिले लापता दंपती के शव, नीली कार से खुली साजिश की परतें
कर्ज में डूबे युवक ने दोस्तों के साथ मिलकर पड़ोसी बुजुर्ग दंपती की हत्या की, शव संदूक में छिपाए और पुलिस को गुमराह करने के लिए 50 किलोमीटर दूर फेंक दिए मोबाइल.
महंगे मोबाइल, ब्रांडेड कपड़ों, घड़ियों, जूतों और रईशी शौक के कारण कर्ज में डूबे 21 वर्षीय युवक ने अपने गांव के पड़ोस में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती की हत्या कर नकदी व जेवरात लूटने की साजिश रची. उसने अपने 3 शहरी और 2 ग्रामीण दोस्तों के साथ मिलकर इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया. आरोपियों ने वेब सीरीज़ और दृश्यम् जैसी फिल्में देखकर साक्ष्य मिटाने के तरीके सीखे थे, लेकिन पुलिस की परंपरागत और आधुनिक अनुसंधान तकनीक के आगे उनकी साजिश धरी रह गई.
12 अगस्त 2026 की अलसुबह उदयपुर जिले के सायरा थाना क्षेत्र स्थित पुनावली गांव में एक दो मंजिला मकान का दरवाजा खुला मिला. मकान में रहने वाले लेहरी लाल पालीवाल (70) और उनकी पत्नी राधा बाई (67) गायब थे. लेहरी लाल का छोटा बेटा मनोहर लाल परिवार सहित गुजरात के सूरत में रहता है, जबकि बड़े बेटे की कुछ साल पहले मृत्यु हो चुकी थी. दंपती घर में अकेले रहते थे. सुबह जब लेहरी लाल रोज की तरह दूध लेने नहीं पहुंचे तो पड़ोसियों को संदेह हुआ.
सूचना मिलने पर निवर्तमान उपसरपंच योगेश पालीवाल ने परिजनों के कहने पर घर के अंदर जाकर देखा. घर का सारा सामान व्यवस्थित था, फर्श साफ था और कहीं भी संघर्ष या चोरी के संकेत नहीं थे. दंपती के जूते-चप्पल भी गायब थे. ग्रामीणों ने अपने स्तर पर तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद लेहरी लाल के भाई धूलीराम ने सायरा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने मोबाइल लोकेशन निकाली तो लेहरी लाल के फोन की अंतिम लोकेशन उदयपुर के लखावली क्षेत्र के पास मिली. पुलिस और ग्रामीणों की टीम उस स्थान पर भी गई, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा. जांच में शामिल ग्रामीणों के साथ गांव का ही जीवन पालीवाल भी मौजूद था, जो वास्तव में हत्या की साजिश का हिस्सा था और पुलिस की हर गतिविधि की जानकारी अपने साथियों को दे रहा था.
13 अगस्त को दंपती का बेटा मनोहर लाल सूरत से पुनावली पहुंचा. पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई न होने से नाराज ग्रामीणों ने सायरा थाने पर प्रदर्शन किया. 14 अगस्त की सुबह घर में मौजूद रिश्तेदारों में से भांजी भूमि पालीवाल जब पोछा लगाते हुए एक बंद कमरे के पास पहुंची, तो उसे तेज बदबू का अहसास हुआ. उसने तुरंत परिजनों को सूचित किया. परिजनों ने सायरा पुलिस को मौके पर बुलाया. जब कमरे में रखे लोहे के बड़े संदूक को खोला गया, तो अंदर बिस्तरों के नीचे प्लास्टिक की थैलियों में पैक और कार्टन टेप से बंधे लेहरी लाल और राधा बाई के शव बरामद हुए.घटना की सूचना पर पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन और आईजी गौरव श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे. एफएसएल, डॉग स्क्वाड और मोबाइल फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए. परिजनों के आक्रोश और आश्वासन के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए उदयपुर के महाराणा भूपाल चिकित्सालय भेजा गया.

जांच की चुनौतियां और पुलिस की जांच प्रक्रिया :
पुनावली गांव मुख्य मार्ग पर स्थित है और लेहरी लाल के मकान तक आने-जाने वाले रास्तों पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था. पुलिस ने मामले के खुलासे के लिए 40 से अधिक पुलिसकर्मियों की विशेष टीमें गठित कीं.शुरुआती 10 दिनों तक पुलिस को हत्या के कारणों का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला. पुलिस ने रंजिश, पारिवारिक विवाद, जमीनी मामलों और संदिग्धों की सीडीआर की गहन जांच की. 45 किलोमीटर के दायरे में होटल्स, दुकानों और टोल प्लाजा के सीसीटीवी खंगाले गए.
हत्या की पूरी साजिश और घटनाक्रम :
27 अगस्त को पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. मुख्य साजिशकर्ता कुशल उर्फ खुशी पालीवाल था, जो लेहरी लाल का पड़ोसी था. कुशल गुजरात के सूरत शहर में नौकरी कर रहा था. वो अपने मित्र चंदन यादव की जिम पर जाता था. उसे मालूम था कि लेहरी लाल ब्याज पर पैसे देते हैं और उनके पास भारी मात्रा में नकदी व जेवरात हैं. अत्यधिक कर्ज में डूबे कुशल ने करीब डेढ़ साल पहले लूट की योजना बनाई थी. उसने अपने दोस्त चंदन यादव, विकास खारवर और दिलीप चौधरी को शामिल किया. बाद में पुनावली के ही किशन पालीवाल और जीवन पालीवाल को भी साथ मिला लिया.
10 अगस्त को कुशल और चंदन ने घर की रेकी की. राधा बाई के परिचित होने के कारण कुशल को घर में प्रवेश मिल गया. राधा ने बाई ने दोनों को खाना खिलाया, फिर घर से बाहर निकलते समय कुशल एक हथौड़ी चुरा लाया.
11 अगस्त की शाम कुशल ने किशन और जीवन के जरिए घर में प्रवेश की योजना बनाई. किशन और जीवन पंचांग (टीपणा) दिखाने के बहाने घर में घुसे. उनका ध्यान भटकाकर कुशल चुपके से घर के बाथरूम में छिप गया. इसके बाद किशन और जीवन बाहर चले गए. राधा बाई ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरे में सो रही थी. वहीं लेहरी लाल पहली मंजिल पर सो रहे थे. दंपती के सोने के बाद कुशल ने मुख्य दरवाजा खोलकर अपने साथियों चंदन, विकास और दिलीप को अंदर बुला लिया.
रात करीब 12 बजे कुशल ने सो रहे लेहरी लाल के सिर पर हथौड़े से वार कर उनकी हत्या कर दी. शव को प्लास्टिक की थैली में पैक कर टेप से बांध दिया और फर्श साफ कर दिया.चूंकि राधा बाई जिस कमरे में सो रही थी, उसका दरवाजा अंदर से बंद था इसलिए आरोपियों ने उसके उठने का इंतजार किया.
तड़के करीब 4 बजे जब राधा बाई अपने कमरे से बाहर निकलीं, तो चंदन ने उनका मुंह दबाया और कुशल ने गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी. इसके बाद आरोपियों ने उसके गहने उतारे और उसके पास चाबियां ले कर अलमारी और पेटी के ताले खोलकर नकदी व जेवरात चुरा ले गए. दोनों शवों को प्लास्टिक में पैक कर उस कमरे में रखे बड़े लोहे के संदूक में डाल दिया गया, जिसमें राधा बाई सो रही थी. शवों को संदूक में डालकर ऊपर से बिस्तर बिछा दिए गए ताकि बदबू बाहर न आए. आरोपी दंपती के मोबाइल, जूते-चप्पल और हत्या में प्रयुक्त हथौड़ी साथ ले गए. मोबाइल को करीब 50 किलोमीटर दूर लखावली के पास चालू करके फेंक दिया गया ताकि पुलिस भ्रमित हो सके.
सीसीटीवी फुटेज से सुलझी गुत्थी, साईबर टीम के सहयोग से उधड़ी साजिश की परतें :
पुलिस ने कई आशंकों को चलते अलग-अलग तरीके से पड़ताल की लेकिन 8 दिन गुजर जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला था. वारदात की जांच में जुटी ज्यादातर टीमों को वापस भेजे दिया गया था, केवल गिर्वा डीसपी व उनकी टीम तथा सायरा थाने की टीमें व साईबर टीम ही काम कर रही थी. तभी गिर्वा डीएसपी को पुनावली में मुख्य सड़क के पास एक मकान पर लगा सिंगल सिम आधारित सीसीटीवी कैमरा मिला. उसकी मेमोरी कार्ड जांचने पर 12 अगस्त की सुबह एक नीले रंग की कार गुजरती हुई दिखाई दी. कैमरा कम क्वालिटी का होने के कारण कार के नंबर स्पष्ट नहीं थे.
पुलिस ने आस-पास के अन्य वैकल्पिक मार्गों के सीसीटीवी खंगाले. ढोल-नांदेशमा मार्ग पर लगे एक कैमरे में वही कार पुनः नजर आई. फुटेज के समय के आधार पर उस दौरान मोबाइल नेटवर्क में सक्रिय नंबरों को ट्रैक किया गया, जिससे कार के मालिक चंदन यादव (सूरत निवासी) का पता चला. पुलिस ने आरटीओ चालान का बहाना बनाकर चंदन से संपर्क किया, जिससे उसके उदयपुर क्षेत्र में आने की पुष्टि हो गई. इसके बाद पुलिस टीमों ने सूरत में दबिश देकर चंदन यादव, कुशल पालीवाल और दिलीप चौधरी को हिरासत में लिया. टैक्सी लेकर मुंबई भागे विकास खारवर को वापी से पकड़ा गया.
उधर, पुनावली में मौजूद किशन और जीवन पालीवाल को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया. पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर सूरत के एक सर्राफा व्यापारी को बेचे गए चोरी के जेवरात बरामद कर लिए हैं. बिचौलिए और सर्राफा व्यापारी को भी गिरफ्तार किया गया. न्यायालय के आदेश पर आरोपियों को रिमांड पर लेकर घटनास्थल की तस्दीक कराई गई, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया है. मामले में सभी आवश्यक बरामदगियां पूर्ण हो चुकी हैं.
