
सरपंची की सनक में रिश्तों का कत्ल
सरपंच का चुनाव लड़ने से रोका तो पिता ने अपने इकलौते बेटे और बहू को बोलेरो से कुचलकर मार डाला.
गांव की चौधर पाने की चाह जब सनक में बदल जाए, तो सत्ता का यह मोह रिश्तों के खून से भी हाथ रंग सकता है. चूरू जिले के चंगोई गांव में सरपंच बनने की जिद ने एक परिवार को उजाड़ दिया. चुनाव लड़ने से रोकने पर पिता इतना बौखलाया कि अपने ही बेटे और बहू को बोलेरो से कुचल दिया. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. पीछे रह गई 11 साल की बेटी, जिसके सिर से माता-पिता का साया एक ही रात में उठ गया. जिस घर में चुनाव लड़ने को लेकर अक्सर कलह होती थी, वहां इस बार विवाद का अंत दो जिंदगियों के खात्मे के साथ हुआ.
गांव की सत्ता का एक पद हासिल करने की चाह ने रिश्तों को इस कदर तार-तार कर दिया कि पिता पर अपने ही बेटे-बहू की हत्या का आरोप है. जिस समय यह दिल दहला देने वाली खूनी वारदात हुई, उस समय आरोपी की पत्नी धर्मा देवी भी धर्मकांटे पर मौजूद थी. बोलेरो से कुचलने की घटना के बाद वह बेसुध हो गईं.
यह घटना चूरू जिले के तारानगर क्षेत्र के चंगोई गांव की है. यहां करीब 60 वर्षीय रामचंद्र धर्मकांटा चलाता है. वह आगामी पंचायत चुनाव में सरपंच पद का चुनाव लड़ना चाहता था, मगर उसका बेटा रविंद्र और बहू महिंद्रा उसे लगातार चुनाव लड़ने से रोक रहे थे. इसी बात को लेकर परिवार में अक्सर विवाद होता था. बेटा-बहू उसे समझाने की कोशिश करते, मगर रामचंद्र अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं था. चुनाव की चर्चा होते ही घर का माहौल तनावपूर्ण हो जाता था.
13 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे चुनाव लड़ने के मुद्दे पर रामचंद्र और रविंद्र के बीच फिर विवाद हुआ. नाराज होकर रविंद्र घर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित धर्मकांटे पर चला गया. कुछ देर बाद रामचंद्र भी वहां पहुंच गया. बहू महिंद्रा को आशंका थी कि पिता-पुत्र के बीच फिर कहासुनी हो सकती है, इसलिए वह भी धर्मकांटे पर पहुंच गई. वहां एक बार फिर चुनाव लड़ने को लेकर विवाद हुआ. रामचंद्र अपनी जिद पर अड़ा रहा. इसके बाद रविंद्र और महिंद्रा घर लौटने लगे. आरोप है कि इसी दौरान रामचंद्र बोलेरो लेकर पीछे से आया और दोनों को कुचल दिया. गंभीर चोटों के कारण रविंद्र और महिंद्रा की मौके पर ही मौत हो गई. जिस विवाद की शुरुआत सरपंची का चुनाव लड़ने को लेकर हुई थी, उसका अंत एक परिवार की दुनिया उजड़ने के साथ हुआ. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा. पुलिस ने रामचंद्र को गिरफ्तार कर लिया. उधर, महिंद्रा के परिजन थाने पहुंचे और गुस्से में आरोपी रामचंद्र की पिटाई कर दी. पुलिस ने बीच-बचाव कर उसे छुड़ाया.

तारानगर के डीएसपी रोहित सांखला के मुताबिक - महिंद्रा के पिता शीशराम ने रामचंद्र के खिलाफ गाड़ी से कुचलकर हत्या करने का मामला दर्ज कराया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. धर्मकांटे पर हुए विवाद के दौरान रामचंद्र की पत्नी धर्मा देवी भी मौजूद थी. वारदात के बाद वह बेसुध हो गई.
रविंद्र पंचायत भवन में किराए पर दुकान लेकर ई-मित्र चलाता था. करीब 13 साल पहले उसकी शादी मेलूसर निवासी महिंद्रा से हुई थी. महिंद्रा गृहिणी थी. दोनों की 11 साल की बेटी मिकारिका है. माता-पिता की मौत के बाद बच्ची पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. परिवार में चुनाव को लेकर होने वाले विवाद से रविंद्र इतना परेशान था कि वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ धर्मकांटे पर बने कमरे में सोने चला जाता था. जिस जगह को उसने घर की कलह से दूर रहने का ठिकाना बनाया था, वही जगह आखिरकार उसके और उसकी पत्नी के लिए मौत का ठिकाना बन गई.
रामचंद्र कुछ साल पहले तक तारानगर में गाड़ियों की खरीद-बिक्री का काम करता था. कुछ समय पहले ही उसने बोलेरो खरीदी थी. चंगोई को परिसीमन के बाद अलग ग्राम पंचायत बनाया गया था. ऐसे में रामचंद्र अपनी पंचायत का सरपंच बनना चाहता था. तारानगर क्षेत्र में पंचायत चुनाव के चौथे चरण में 16 नवंबर को मतदान होना है. चुनाव लड़ने की उसकी चाह इतनी प्रबल हो गई थी कि बेटे-बहू के बार-बार समझाने के बावजूद वह पीछे हटने को तैयार नहीं था.
ग्रामीणों के मुताबिक - चुनाव की बात उठते ही घर में झगड़ा शुरू हो जाता था. रविंद्र और महिंद्रा उसे चुनाव नहीं लड़ने के लिए समझाते थे, मगर विवाद लगातार बढ़ता गया.
आखिरकार यह पारिवारिक कलह एक ऐसी त्रासदी में बदल गई, जिसकी कीमत दो जिंदगियों और एक बच्ची के भविष्य ने चुकाई. सरपंच का पद गांव के विकास, जनसेवा और लोगों की समस्याएं सुलझाने की जिम्मेदारी का प्रतीक है. लेकिन जब यही पद प्रतिष्ठा और जिद का सवाल बन जाए, तो लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई मानी जाने वाली ग्राम पंचायत की राजनीति परिवारों के भीतर तक जहर घोल सकती है. चंगोई की घटना इसी विडंबना को उजागर करती है.
