
भीलवाड़ा में कांग्रेस के साथ नहीं होगा 'हाथ'
भीलवाड़ा में कांग्रेस के सिंबल अटके, कलेक्ट्रेट में 5 घंटे चला हाईवोल्टेज ड्रामा, गेट बंद होने पर भड़की कांग्रेस, बोली- प्रशासन के खिलाफ जाएंगे कोर्ट
राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में नामांकन के अंतिम दिन भीलवाड़ा में बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है. कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों को पार्टी सिंबल जमा कराने को लेकर कांग्रेस नेताओं और प्रशासन के बीच ऐसा टकराव हुआ कि मामला देर रात तक गरमाया रहा. कांग्रेस ने प्रशासन पर तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने और तय समय से पहले पहुंचने के बावजूद सिंबल जमा नहीं करने देने का आरोप लगाया है. वहीं, करीब पांच घंटे तक चले धरने और समझाइश के बाद भी कोई समाधान नहीं निकल सका. अब कांग्रेस ने अदालत जाने का ऐलान किया है.
नगर निकाय चुनाव के नामांकन का सोमवार को अंतिम दिन था. निर्वाचन प्रक्रिया के तहत दोपहर 3 बजे नामांकन का समय समाप्त होते ही कलेक्टर कार्यालय के गेट बंद कर दिए गए. प्रशासन के अनुसार तय समय तक परिसर के अंदर पहुंच चुके प्रत्याशियों के नामांकन ही स्वीकार किए गए, जबकि बाहर मौजूद लोगों को प्रवेश नहीं दिया गया मगर कांग्रेस का आरोप है कि पार्टी के नेता और अधिकृत प्रत्याशी तय समय से पहले कलेक्टर कार्यालय पहुंच चुके थे और पार्टी सिंबल से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं. इसी दौरान समय समाप्त होने का हवाला देते हुए गेट बंद कर दिए गए, जिससे कुछ प्रत्याशियों को पार्टी के अधिकृत सिंबल नहीं मिल सके.
कांग्रेस जिलाध्यक्ष का आरोप
'' पार्टी की ओर से तय समय से पहले निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. कुछ सिंबल भरने और जमा कराने की प्रक्रिया बाकी थी. एआरओ के निर्देश पर कांग्रेस नेता पास के एक कमरे में बैठकर शेष सिंबल भरने की प्रक्रिया पूरी कर रहे थे. इसी दौरान नामांकन का निर्धारित समय समाप्त हो गया और कलेक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए गए. जिन प्रत्याशियों की प्रक्रिया चल रही थी, उन्हें भी पार्टी सिंबल स्वीकार करने का अवसर मिलना चाहिए था. ''
सिंबल जमा नहीं होने के बाद कांग्रेस पदाधिकारी और नेता करीब शाम 4 बजे एआरओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए. इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच लगातार समझाइश का दौर चला. करीब पांच घंटे तक चली बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी. देर रात तक कांग्रेस नेता प्रशासन से सिंबल स्वीकार करने की मांग पर अड़े रहे.
आखिरकार रात करीब 9:15 बजे कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक ने धरना समाप्त करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब इस मामले को अदालत में ले जाएगी और प्रशासन तथा भाजपा सरकार के कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगी. इस पूरे घटनाक्रम की एक बड़ी वजह नामांकन के अंतिम समय तक दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से अधिकृत प्रत्याशियों की सूची को लेकर बनी असमंजस की स्थिति भी रही. जानकारी के अनुसार कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक दोपहर करीब 2:45 बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची लेकर निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचे, जबकि भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा करीब 2:50 बजे अंतिम सूची के साथ पहुंचे.
इसके बाद दोनों दलों के फाइनल दावेदारों को फोन कर नामांकन दाखिल करने के लिए कहा गया. अंतिम मिनटों में उम्मीदवारों की सूची और सिंबल से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश ने कलेक्ट्रेट में भारी राजनीतिक दबाव की स्थिति पैदा कर दी. भीलवाड़ा की यह घटना अब राजस्थान के नगर निकाय चुनाव की बड़ी राजनीतिक घटनाओं में शामिल हो गई है. कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा और प्रशासनिक पक्षपात का मामला बता रही है, जबकि प्रशासन की ओर से नामांकन के निर्धारित समय और चुनावी नियमों का पालन किए जाने की बात सामने आ सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अदालत इस मामले में कांग्रेस को कोई राहत देगी और जिन प्रत्याशियों के सिंबल जमा नहीं हो सके, उनके चुनावी भविष्य पर इसका क्या असर पड़ेगा
भीलवाड़ा का यह विवाद आने वाले दिनों में केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहने वाला. नगर निकाय चुनाव के बीच कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं. भीलवाड़ा में सिंबल विवाद ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया के अंतिम मिनटों की अव्यवस्था और राजनीतिक दलों की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब मामला अदालत पहुंचता है तो यह तय होगा कि समय सीमा, प्रशासनिक प्रक्रिया और राजनीतिक दलों के अधिकारों के बीच कानून किसके पक्ष में खड़ा होता है.
