
सोशल मीडिया पर करोड़ों की फौज, गांव में मिले महज 277 वोट
डिजिटल दुनिया के स्टार पवन साहू का गांव की चौपाल पर रुतबा बेअसर, करोड़ों फॉलोअर्स भी नहीं दिला सके सरपंच की कुर्सी
सोशल मीडिया पर करोड़ों की फैन फॉलोइंग, लाखों लोगों तक पहुंच और डिजिटल दुनिया में जबरदस्त लोकप्रियता. लेकिन जब बात गांव की सरकार चुनने की आई तो यह लोकप्रियता वोटों में तब्दील नहीं हो सकी. पंचायतीराज चुनाव के नतीजों ने सोशल मीडिया की ताकत और जमीनी राजनीति की हकीकत के बीच का अंतर उजागर कर दिया. शाहपुरा उपखंड की फुलिया कलां ग्राम पंचायत में चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू को करारी हार का सामना करना पड़ा. उन्हें महज 277 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहीं.
सरपंच पद के चुनाव में भगवती लाल सोनी ने 1203 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की. वहीं पूर्व सरपंच कालूराम 797 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे. नतीजों ने साफ कर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोकप्रियता का पैमाना और गांव में मतदाताओं का भरोसा दो अलग-अलग कसौटियां हैं.
पवन साहू सोशल मीडिया की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं. उनके इंस्टाग्राम पर करीब 70 लाख और यूट्यूब पर 2 करोड़ 77 लाख फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं. इतनी बड़ी डिजिटल पहुंच के चलते कोमल साहू की चुनावी उम्मीदवारी भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही.
पवन साहू ने अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारते हुए 'मेरा गांव, मेरी पहचान' का नारा दिया था. चुनाव प्रचार में स्वच्छता, सड़क, पेयजल, शिक्षा और युवाओं के बेहतर भविष्य जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया. सोशल मीडिया के जरिए भी प्रचार को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की कोशिश हुई. इसके बावजूद मतदाताओं ने उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं दिया और कोमल साहू 277 वोटों पर ही सिमट गईं.

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पवन साहू ने विजयी प्रत्याशी भगवती लाल सोनी को बधाई दी. उन्होंने कहा कि चुनाव में हार मिलने के बावजूद प्रचार के दौरान ग्रामीणों से किए गए वादों से वे पीछे नहीं हटेंगे. गांव में हैंडपंप और लाइट जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए उन्होंने अपने स्तर पर आर्थिक सहयोग करने की बात भी कही.
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब हार के कारणों को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं. स्थानीय स्तर पर चुनाव के दौरान पवन साहू के समर्थन और विरोध में दो धड़े बनने की बात भी सामने आ रही है. इसके अलावा जातिगत समीकरण, स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियां, व्यक्तिगत जनसंपर्क और मतदाताओं से सीधा जुड़ाव भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाले कारक माने जा रहे हैं.
दरअसल, सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की लोकप्रियता का दायरा भले ही देश-दुनिया तक फैला हो, लेकिन पंचायत चुनाव में मतदाता अपने आसपास की परिस्थितियों, प्रत्याशी की उपलब्धता, स्थानीय संबंधों और गांव के मुद्दों को भी अहमियत देते हैं. ऐसे में डिजिटल प्रचार की व्यापक पहुंच जमीनी जनसमर्थन की गारंटी नहीं बन सकी.
पवन साहू भीलवाड़ा जिले के चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं. फिटनेस ट्रेनर, ऑनलाइन कोच और कंटेंट क्रिएटर के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है. वर्ष 2017 में यूट्यूब चैनल शुरू करने के बाद फिटनेस, बॉडी बिल्डिंग, घरेलू नुस्खों और मोटिवेशन से जुड़े उनके वीडियो लोकप्रिय हुए. देखते ही देखते उनकी डिजिटल फैन फॉलोइंग करोड़ों तक पहुंच गई.
फुलिया कलां का यह चुनाव परिणाम ग्रामीण राजनीति के लिए एक दिलचस्प संदेश छोड़ गया है. सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों का जुड़ाव किसी को डिजिटल स्टार तो बना सकता है, लेकिन गांव की सरकार बनाने के लिए चौपाल पर भरोसा, मतदाताओं से सीधा संवाद और जमीनी स्तर पर स्वीकार्यता भी जरूरी है. अंततः चुनाव में फैसला फॉलोअर्स ने नहीं, गांव के मतदाताओं ने किया.
