
टोंक में चुनावी रण तैयार, 19 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर, 11 में त्रिकोणीय संघर्ष
जिला परिषद की 30 सीटों पर 73 और पंचायत समितियों की 95 सीटों पर 301 प्रत्याशी मैदान में
पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही टोंक जिले में चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है. जिला परिषद की 30 सीटों पर 73 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं वहीं पांच पंचायत समितियों की 95 सीटों पर 301 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाएंगे. जिला परिषद के 19 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होगी वहीं 11 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बनी है. वार्ड संख्या 22 में सबसे अधिक चार प्रत्याशी मैदान में हैं. जिला परिषद के वार्ड संख्या 4 में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त होने के बाद भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं.
जिला परिषद के 31 वार्डों के लिए कुल 115 नामांकन पत्र दाखिल हुए थे. संवीक्षा के दौरान 32 नामांकन पत्र खारिज होने के बाद 83 उम्मीदवार शेष रहे. नाम वापसी के दौरान नौ उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए. वहीं वार्ड संख्या 4 में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए. इसके बाद शेष 30 सीटों पर 73 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह गए हैं.
सांख्यिकी प्रकोष्ठ के प्रभारी अधिकारी रामजीलाल शर्मा के अनुसार - नाम वापसी के अंतिम दिन वार्ड संख्या 3 से सुरेश कुमार, 7 से सांवरमल जाट, 10 से दीपक कुमार, 15 से शांति, 18 से मुकेश, 20 से इंद्रा देवी तथा वार्ड 25 से रमेश और गोविंद नारायण शर्मा ने नाम वापस लिए. इनमें अधिकांश उम्मीदवार राजनीतिक दलों से जुड़े थे. पार्टी प्रत्याशियों की समझाइश और चुनावी समीकरणों को देखते हुए उन्होंने मैदान छोड़ना बेहतर समझा.
जिला परिषद के चुनाव में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर के साथ निर्दलीय एवं अन्य दलों के प्रत्याशी भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं. वार्ड संख्या 22 में सबसे अधिक चार उम्मीदवार मैदान में हैं. देवली और उनियारा क्षेत्र में परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या बढ़ी है. इससे इन क्षेत्रों में नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं. जिला प्रमुख पद की दावेदारी को देखते हुए भी कुछ वार्ड बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. वार्ड संख्या 21, 22, 23 और 29 में मुकाबला अधिक दिलचस्प रहने की संभावना है. इन क्षेत्रों से जिला प्रमुख पद के दावेदारों की राजनीतिक ताकत का भी अंदाजा लगेगा. जिला परिषद में इस बार 32 महिला और 41 पुरुष प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं.
जिला परिषद चुनाव में भाजपा के सामने अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने की चुनौती होगी. वर्ष 2020-21 में हुए चुनाव में जिला परिषद की 25 सीटों में से भाजपा ने 15 पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को 10 सीटें मिली थीं. इस बार नए परिसीमन के चलते वार्डों की संख्या 25 से बढ़कर 31 हो गई है.
बदली हुई भौगोलिक सीमाओं और नए क्षेत्रीय समीकरणों के बीच दोनों ही दलों के सामने अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करने की चुनौती है. कांग्रेस नए परिसीमन का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है जबकि भाजपा पिछली बढ़त बरकरार रखने के प्रयास में है. ऐसे में इस बार का चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है.
पंचायत समितियों की 95 सीटों पर 301 उम्मीदवार :
तीसरे चरण में जिले की देवली, मालपुरा, पचेवर, पीपलू और उनियारा पंचायत समितियों की 95 सीटों पर भी चुनाव होंगे. इन सीटों पर कुल 301 उम्मीदवार मैदान में हैं.पंचायत समिति वार आंकड़ों के अनुसार देवली की 25 सीटों पर 81, मालपुरा की 15 सीटों पर 46, पचेवर की 15 सीटों पर 45, पीपलू की 17 सीटों पर 58 और उनियारा की 23 सीटों पर 71 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे.पिछले चुनाव में जिले की सात पंचायत समितियों की 135 सीटों पर 368 उम्मीदवारों ने भाग्य आजमाया था. इस बार पंचायत समितियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है और पचेवर पंचायत समिति में पहली बार चुनाव होंगे. नए परिसीमन और बदले हुए चुनावी समीकरणों के बीच पंचायत समितियों में भी मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है.
- जिला परिषद की 31 में से 30 सीटों पर होंगे चुनाव
- 32 महिला प्रत्याशी मैदान में
- 41 पुरुष उम्मीदवार
- 5 पंचायत समितियों में 301 प्रत्याशी
