
30 बेटियों के कन्यादान से बनाई पहचान, अब नंगे पैर मांग रहे जनता का आशीर्वाद
सरपंच बनने से पहले ही सेवा के मैदान में उतरे प्रधान चौधरी, गरीब परिवारों की बेटियों की शादी से लेकर गांवों में बिजली, पानी और सड़कों की व्यवस्था तक में निभा रहे भागीदारी.
राजनीति में अक्सर लोग चुनाव जीतने के बाद जनता की सेवा के वादे करते हैं मगर जयपुर जिले की फागी तहसील के छोटे से गांव खंडूज निवासी प्रधान चौधरी ने सेवा का रास्ता चुनाव से पहले ही चुन लिया. अब वे इसी सेवा की पूंजी लेकर परवण पंचायत से सरपंच बनने के लिए मैदान में उतरे हैं. दिलचस्प बात यह है कि सरपंची पाने के लिए उनका चुनाव प्रचार भी अनूठा है. प्रधान चौधरी पिछले कई दिनों से नंगे पैर गांवों की गलियों और ढाणियों में घूमकर लोगों से वोट और आशीर्वाद मांग रहे हैं.
प्रधान चौधरी की पहचान केवल एक चुनावी प्रत्याशी के रूप में नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों की मदद करने वाले व्यक्ति के रूप में भी बनी है. वे अब तक दूदू विधानसभा क्षेत्र में 30 से अधिक बेटियों की शादी में आर्थिक मदद कर उनका कन्यादान करवा चुके हैं. आर्थिक रूप से कमजोर और असहाय परिवारों के लिए उनकी यह मदद किसी संबल से कम नहीं रही है. किसी गरीब परिवार की बेटी की शादी में आर्थिक परेशानी सामने आती है तो प्रधान चौधरी ने आगे बढ़कर सहयोग करते हैं.

प्रधान चौधरी के सामाजिक सरोकार केवल बेटियों की शादी तक सीमित नहीं हैं. परवण पंचायत के सरकारी स्कूल में करीब 40 हजार रुपए की लागत से वाटर कूलर लगवाकर उन्होंने बच्चों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था करवाई है. अपने गांव खंडूज के स्कूल में बिजली की सुविधा उपलब्ध करवाने के साथ ही विभिन्न स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई की सामग्री वितरित की है. गांवों में नशामुक्ति शिविर आयोजित करवाकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हैं और गांवों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रधान चौधरी लगातार सक्रिय रहे हैं. चुनाव जीतने से पहले ही अपने खर्च पर कई गांवों में रोड लाइट लगवा चुके हैं और जरूरत के मुताबिक कई जगह ग्रेवल सड़कों का निर्माण करवाया है. दूदू विधानसभा क्षेत्र के गांवों और ढाणियों में हर साल पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में जुटे हैं.

चुनावी मैदान में उतरने के बाद प्रधान चौधरी ने प्रचार का अलग ही तरीका अपनाया है. वे पिछले कई दिनों से नंगे पैर गांव-ढाणियों में पहुंच रहे हैं. उनके इस अंदाज ने चुनावी चर्चा को रोचक बना दिया है. उनका कहना है कि जनता की सेवा के लिए वे पहले भी अपने स्तर पर प्रयास करते रहे हैं और आगे भी इसी भावना से काम करना चाहते हैं. अब परवण पंचायत के लोगों के बीच पहुंचकर वे अपने कामों के आधार पर समर्थन मांग रहे हैं. प्रचार के दौरान गांव को जो भी व्यक्ति उनके सामने आता है उसे वो माला पहनाना नहीं भूलतेे. लोग भी जगह-जगह पर उनका साफा पहनाकर स्वागत कर रहे हैं. गांव के बुजुर्ग अपने सेवाभावी उम्मीदवार पर खूब प्यार लुटा रहे हैं वहीं सैंकड़ों युवाओं की टीम उनका नाम लिखी टीशर्ट पहनकर हर वक्त उनके साथ डटी रहती है.
प्रधान चौधरी के सामने सरपंच बनने की चुनौती तो है, मगर उनका दावा है कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता का विश्वास और गांवों का विकास है. अब देखना यह होगा कि सेवा के इन प्रयासों और नंगे पैर किए जा रहे प्रचार को परवण पंचायत की जनता अपने मतों से कितना समर्थन देती है.
