कर्मचारियों की तरह सरपंचों के लिए भी बने आयोग : पचाला
फागी ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष भंवरसिंह पचाला से पंचायत प्रहरी की खास बातचीत
दिलीप सिंह
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सरपंच सरकार और जनता के बीच की अहम कड़ी है. समय के साथ इस कड़ी को मजबूत किया जाना चाहिए था मगर सरकारों की अनदेखी के चलते यह ओर कमजोर होती गई. विधायक, सांसद, मंत्री और पॉवरफुल होते गए और सरपंचों के अधिकारों में लगातार कटौती की जाती रही. हालात ये हो गए हैं कि सरपंचों को अब पंचायतों की छोटी-छोटी जरूरतों के लिए सरकार का मूंह ताकना पड़ता है। उनके वेतन भत्तों, गांवों की समस्याओं जैसी अहम चीजों के लिए भी बार-बार सड़क पर उतरना पड़ता है। राजस्थान में पंचायतों की समस्याओं को लेकर राजस्थान सरपंच संघ के फागी ब्लॉक अध्यक्ष भंवर सिंह पचाला से पंचायत प्रहरी के विशेष संवाददाता दिलीप सिंह ने विशेष बातचीत की. पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश-
आज सरपंचों की सबसे बड़ी परेशानी क्या हैॽ सरपंचों की सबसे बड़ी परेशानी सरकार पर आर्थिक निर्भरता है. हमें अपने छोटे-छोटे कामों के लिए सरकार का मूंह ताकना पड़ता है. एमएलए-सांसद अपने वेतन भत्ते तुरंत बढ़ा लेते हैं मगर हमें हमारे भत्तों के लिए हर बार सड़क पर उतरना पड़ता है.
सरपंचों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की क्या व्यवस्था होनी चाहिएॽ जिस तरह सरकारी कर्मचारियों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी के लिए वेतन आयोग बनाए जाते हैं उसी तरह सरपंचों के लिए भी आयोग का गठन होना चाहिए. विधायक-सांसद विधेयक लाकर जब चाहे अपने वेतन-भत्ते बढ़ा लेते हैं. विधायकों और सांसदों को अपने क्षेत्र में जाने के लिए अलग से भत्ता मिलता है, वो तो कभी-कभी अपने क्षेत्र में आते हैं जबकि हम पूरे दिन अपने क्षेत्र में चक्कर लगाते हैं, ऐसे में हमें भी अलग से पंचायत क्षेत्र भत्ता मिलना चाहिए.
आपके कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण कार्यॽ हमने अपने इस कार्यकाल में रियासतकालीन ऐतिहासिक पचाला सागर बांध को पुनर्जीवित किया है. प्राचीन समय में पेयजल और खेती का मुख्य स्रोत रहा यह बांध गुम हो गया था. सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में इसका उल्लेख था मगर धरातल पर नजर नहीं आ रहा था. हमने इस बांध को पंचायत के अधीन लाकर मनरेगा कार्यों के जरिए इसका जीर्णोद्धार करवाया है. अब यह बांध न सिर्फ पेयजल बल्कि खेती के भी काम आ रहा है. हम चाहते हैं कि सरकार इस बांध की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए हमें आर्थिक सहायता दे ताकि हम इसके पुराने वैभव को फिर से लौटा सकें.
पंचायत के लिए कौन से काम किए हैंॽ हमारी पंचायत के अधीन आने वाली बागरियों की ढाणी के लिए पिछले पांच साल में हमने खूब विकास कार्य करवाएं हैं. सड़क, बीसलपुर पेयजल, स्कूल व आंगनबाड़ी का काम पहली बार हुए हैं जिसके कारण वहां के 100 परिवारों को खूब राहत मिली है. पचाला श्मशान भूमि तक पहले जाना मुश्किल था क्योंकि कच्चा रास्ता होने के कारण कीचड़ और पानी भरा रहता था. हमने अब इस रास्ते का पक्का किया है. इसी तरह तिवाड़ियों का चौक भी पहले कीचड़ में धंसा रहता था, वहां के लोगों को घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल था, हमने वहां नालियां बनाकर चौक को पक्का कर दिया है जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली है. पचाला में पहली बार उप स्वास्थ्य केंद्र का आधुनिक भवन बना है जिसमें चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ है. अब सर्दी, खांसी जैसी बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को फागी या जयपुर नहीं जाना पड़ता.
आपके परिवार पर लोगों का इतना भरोसा क्यों हैंॽ जब से देश में पंचायतीराज व्यवस्था लागू हुई है तब से अधिकांश समय पचाला पंचायत ने हमारे परिवार को ही सरपंच चुना गया है. मेरे पिता इस पंचायत के पहले सरपंच थे. उस वक्त सरपंच ही प्रधान बनता था, ऐसे में सरपंच बनने के बाद वो तीन बार पंचायत समिति के प्रधान रहे. इसके बाद मैं, मेरी पत्नी और बेटी को पंचायत की सेवा करने का अवसर मिला. हमने पंचायत की जिम्मेदारी को हमेशा सर्वोपरि रखा है, इसीलिए पंचायत के लोग हम पर भरोसा करते हैं. हमने उनके भरोसे को न पहले ठेस पहुंचाई है न आगे पहुंचाएंगे.
कोई ऐसा काम जो आप नहीं कर पाएॽ मैं शंकरपुरा से पचाला तक सड़क का डामरीकरण करना चाहता था. इसके लिए हमने पूरे प्रयास भी किए मगर यह काम नहीं हो पाया. अब मैं चाहता हूं कि अगले कार्यकाल में यह काम हो ताकि हमारे गांव से दूदू और जयपुर के लिए सीधा और सुगम आवागमन हो सके.
सरपंच को हमेशा कमतर क्यों आंका जाता हैॽ
मुख्यमंत्री, विधायक, मंत्री चाहे कितने ही बड़े पदों पर बैठे हों मगर उन्हें चुनाव जीतने के लिए सरपंचों के पास आना ही पड़ता है. हम सरकार और जनता के बीच की अहम कड़ी हैं. मंत्री, विधायक ये समझते हैं कि अगर सरपंचों को पॉवरफुल बना दिया तो हमारी पूछ कम हो जाएगी मगर उन्हें यह समझना लेना चाहिए कि हम जिन्हें जीता सकते हैं तो उन्हें हराने का मादा भी हम रखते हैं. अगर सरपंच खिलाफ हैं तो किसी भी एमएलए में इतनी ताकत नहीं है कि वह अपने दम पर चुनाव जीत जाए.
सरपंच कमजोर हो रहा है, एमएलए सांसद शक्तिशाली हो रहे हैंॽ
सरकार और विधायकों को यह देखना चाहिए कि सरपंचों की शक्ति कैसे बढ़े. जो एमएलए सरपंचों की समस्याओं को महत्व देते हैं, उनके साथ जनता का जुड़ाव बना रहता है मगर जो एमएलए सरपंचों को अपनी कठपुतली समझते हैं उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ती है.
पंचायतों को अभी भी सरपंच पतियों से छूटकारा नहीं मिला हैॽ
पंचायतों में आज 60 प्रतिशत तक महिलाएं सरपंच चुनी जाती हैं. समय के साथ कुछ चीजें बदली भी हैं. पहले चाहे सरपंच पति रहे हों मगर आज बड़ी तादाद में महिला सरपंच अपने फैसले खुद ले रही हैं. मेरे घर से मेरी बेटी और पत्नी ने कई साल तक पंचायत का काम संभाला है. मैनें उनके काम काज में किसी तरह की दखलंदाजी नहीं की. आज भी वो दोनों मुझे पंचायत के कामों में मदद करती हैं.
क्या सरकारें राजनीतिक दुर्भावना से सरपंचों को हटाती हैंॽ
हां, यह सही है कि प्रदेश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, हर बार करीब 800 से 1000 सरपंचों को कोई भी आरोप लगाकर बीच में ही हटा दिया जाता है. आरोप तो विधायकों और सांसदों पर भी लगते हैं मगर उन्हें तो कोई नहीं हटाता. क्या विधायकों के ही विशेषाधिकार होते हैं, सरपंचों के नहीं. अभी सारे पॉवर सरकार के हाथ में है, जिस दिन हमें मौका मिला हम सरकार को हिला कर रख देंगे.
आज गांवों की सबसे बड़ी जरुरत क्या हैॽ
गांवों में जनसंख्या बढ़ रही है. परिवार बढ़ने से नए आवासों की जरुरत होती है, मगर आबादी भूमि हमारे पास है नहीं. हमें कृषि भूमि को आबादी में कन्वर्ट में कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं मगर फिर भी काम नहीं होता. हम चाहते हैं कि कृषि या सार्वजनिक भूमि को आबादी में कन्वर्जन के लिए सरपंचों को अधिकारी मिलने चाहिए. राजस्थान में अधिकांश श्मसान तालाब की पाल पर हैं. सरकार ने तालाब की पाल पर श्मसानों पर रोक लगा दी है. हमारे पास कोई अन्य जगह नहीं है जहां श्मसान बनाए जा सकें.
अगले पांच साल में फिर मौका मिलेगा तो क्या करेंगेॽ
सबसे पहले तो हम पचाला सागर बांध को उसका ऐतिहासिक वैभव लौटाएंगे. शंकरपुरा से पचाला तक सड़क बनाएंगे. शंकरपुरा, भरतपुरा रोड का डामरीकरण होने से दूदू और अजमेर का नया संपर्क मार्ग बन जाएगा. जयपुर के लिए भी राह आसान हो जाएगी. हमें इसके लिए फागी या बगरू नहीं जाना पड़ेगा.
पंचायतों के काम ओर बेहतर कैसे हो सकते हैंॽ
सबसे पहले तो सरपंचों को अधिकार देने पड़ेंगे. इसके अलावा सरपंचों को ऑनलाइन कामों की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. गांवों में ग्राम सभाएं होती हैं उसी तरह सरकार को भी सरपंचों से मुलाकात के लिए अलग से कोई दिन निर्धारित करना चाहिए. जिला प्रभारी मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में हर एक दो माह में सरपंचों के साथ बैठक कर गांवों की समस्या पर विचार करना चाहिए.
सरपंचों को नए कार्यक्रमों और योजनाओं की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए. विलेज डवलपमेंट ऑफिसर (VDO) और सरपंच के बीच तामलेल होना चाहिए तभी पंचायत का समुचित विकास हो पाएगा. दोनों के बीच समन्वय से ही पंचायत के लोगों की समस्या का त्वरित समाधान होगा. जहां दोनों में तालमेल नहीं होगा वहां लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. मैं अपनी पंचायत के VDO शिवराज सिंह नरूका को उनके काम की पूरी आजादी और सम्मान देता हूं और वो हमारी पंचायत के काम को पहली प्राथमिकता में रखते हैं.